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गणतंत्र दिवस विशेष – फ़िल्मी सिंघम नहीं ‘इल्मी सिंघम’

भारत माँ के सच्चे सिपाही को शत शत नमन

श्यामली, उत्तर प्रदेश । आजकल बहुत आम देखा गया है की ज़रा सा कोई भी पुलिस वाला अच्छा काम करदे तो मीडिया उसे फ़िल्मी ‘सिंघम’ की तुरंत उपाधि देती है। ऐसे मौहौल में पूरे देशभर में चर्चा का विषय बने हुए है 2011 बैच के आईपीएस अफसर अजय कुमार पांडेय जो फ़िल्मी नहीं इल्मी सिंघम है। आइये आज गणतंत्र दिवस के मौके पर आपका तार्रुफ़ करवाते हैं एक ऐसे पोलिसवाले से जिसने सभी का दिल जीत रखा है ।

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ज़िले श्यामली एस पी अजय कुमार एक गरीब किसान के बेटे है  जो छह भाइयो में से पांचवे है और घर में गरीबी के चलते इन्होने ही अपने बाकी भाइयो की पढाई का ज़िम्मा भी उठाया , जिनके ताऊजी शिक्षक है और इन्होने अपने जीवन के 7 वर्ष प्राइवेट नौकरियों में निकले लेकिन एक दिन, एक बार ठान लिया की सिर्फ खुद के लिए पैसा और घरवालों के लिए आराम की ज़िन्दगी बिताना ही उनका मकसद नहीं , लोक सेवा में आकर वो असल में लोक सेवा ही करना चाहते थे, इसीलिए एक बहुत अच्छी तनख्वाह की दुबई में नौकरी से स्तीफा देकर एक साल जमके पढाई की और पहली ही बार में आईपीएस की कठिन परीक्षा पास कर उत्तर प्रदेश कैडर को ज्वाइन किया।

जहाँ अक्सर कई अधिकारी पब्लिसिटी के भूखे होते है वही इन्होने चुपचाप निरंतर लो प्रोफाइल होकर अपना काम किया, मीडिया की नज़र इस छुपे रुस्तम पर तब पड़ी जब इन्होने फ़िरोज़ाबाद एस पी होते हुए  कन्या जूनियर हाई स्कूल को गोद लिया जो पूरे प्रदेश में एक मिसाल के तौर पर देखा आया। ऐसा क्या खास है इस इल्मी सिंघम में जो पूरे देश में ये सभी के लिए प्रेरणा सोत्र बने हुए है ? आइये समझाते है  वो चार मुख्य बिंदु जो इनकी सफलता है राज़ हैं :-

1 ) जनता के लिए बेहद विनम्र व ‘अप्रोचेबल’
अक्सर जनता के बीच में पुलिस को लेकर एक भय होता है और यही कारण है की बहुत सारी घटनाये तो दर्ज ही नहीं होती , अजय कुमार खुद जनता के बीच जाकर संवाद करते है , ये अक्सर रिहाइशी मुहल्लों में , स्कूलों में बच्चो के बीच , बाज़ारो में व्यापारिओं के बीच बहुत सहजता से घुल मिल जाते है और इन सभी को अजय  बड़े अफसर नहीं बल्कि उन्ही के भाई , बेटे, मित्र व साथी लगते है और यही प्रमुख कारण है की सभी सूचनाएं उन तक सीधे पहुँचती है जिससे अपराध पर कड़ी नकेल कस दी गयी है।

2) अपनी टीम पर काम किया, निकम्मों को सजा और लायकों को ज़िम्मेदारी
ऐसे सभी थाना इंचार्जो को , दरोगाओं पर पहले ही दिन से पैनी नज़रे बना कर रखी , रिकॉर्ड के साथ आमजन से भी फीडबैक लिया और आरोपों में घिरे अधिकारिओ को हटाकर स्वच्छ छवि और अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले अफसरों को टीम का हिस्सा बनाया।

टीम मैनेजमेंट के लिए हर माह मासिक गोष्टी का आयोजन किया जिसमे हर थानाधिकारी व उसकी टीम का मुख्यांकन करके उन्हें सम्मानित किया जाता है।

40 पॉइंट रेटिंग स्केल से सभी योग्यताओ के आधार पर बराबर तोला, ये 40 पॉइंट रेटिंग स्केल भी पूरे देश के पुलिस विभागों में चर्चा और अनुसरण का विषय बानी। उन्हें ये बात अच्छी तरह से ज्ञात थी की कोई भी बड़ा काम अकेले नहीं किया जा सकता , एक अच्छी टीम ही बड़ी सफलता दिला सकती है

3 ) अपराधियों की कमर तोड़ी , वो भी बहुत तेज़ी से
अपनी जोइनिंग के बाद , तीन माह के अंदर इन्होने अपराध के खिलाफ क्रेकडाउन, शिकंजा, चक्रव्यूह आपरेशन चलाया जिसमे छः सौ अपराधियों को सलाखो के पीछे किया जो शायद अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सबसे ख़ास बाद ये की अपराध बड़ा हो या चाहे बुलेट मोटरसाइकिल से पटाखे छुडाके आमजन को परेशां करने जैसा , सब को संजीदगी से लेते हुए तुरंत कार्यवाही की और जनता को ये विश्वास दिलाया की अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा , अपराध अपराध होता है।

4 ) सरकारी अफसर बनकर नहीं बल्कि जन सेवक बनकर सबको गले लगाया
अजय कुमार ने व्यापारिओं से लम्बे समय से रंगदारी कर रहे बदमाशों से श्यामली आते ही उन्हें निजात दिलाई तो मानों उनके गहरे ज़ख्म को पलभर में ठीक कर दिया  , इस निजात से गद्गद हुए व्यपारियो ने उनका सम्मान किया।
फ़िरोज़ाबाद की तरह ही उन्होंने श्यामली में भी स्कूल को गोद लिया , छोटे छोटे गाँव में जाकर नन्हे मुन्हे बच्चो को पढ़ाया , अपने सत्कार के लिए लायी हुई मालाओं को उन्ही नन्हें मुन्ने बच्चो को पहनाते हुए बोले ”ये बच्चे इस गाँव के होनहार हैं, भविष्य हैं; मैं इन्हें फूलमालाएँ पहना रहा हूँ, और इस बात को ये जीवन भर याद रखेंगे और कभी भी नशे की लत में नहीं पड़ेंगे ऐसा मेरा विश्वास है। साथ ही, ये जब अपने घरों को लौटेंगे तो मेरा यह संदेश कम से कम नौ घरों में तो ज़रूर पहुँचेगा; जिसका लाभ बहुत से अन्य लोगों को भी मिलेगा।” एसपी के इस क़दम से वहाँ पर मौजूद कई लोग भावुक हो उठे; तो वहीं दूसरी तरफ़ बच्चों के चेहरे की ख़ुशी और कप्तान की सकारात्मक सोच और अच्छी नीयत का हर कोई मुरीद हो उठा। पुलिस प्रशासन ज़िन्दाबाद के नारों से पूरा गाँव गूँज उठा।

ये सब वो आज से नहीं कर रहे ना ही मीडिया में सुर्खिया बटोरने के लिए कर रहे है , वो ये तब से कर रहे है जब उन्हें पुलिस की पहली पोस्टिंग मिली परन्तु तब जूनियर अफसर होने की वजह से किसी का ध्यान इस  सिपाही पर नहीं गया।

आज गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर मैं स्वयॅ को बहुत गौरान्वित महसूस कर रहा हु क्युकी देश में एक ऐसा वरिष्ठ पुलिस वाला भी है जो अपने पद से जुड़े लोभ, अहंकार से बहुत दूर है और लगातार सभी विपरीत परस्तिथियों का सामना करते हुए जनता की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रहा है।

एक महान कवी की कविता की चंद पंक्तियाँ  –
‘देश के लिए मर के जिए तो क्या जिए , बात तो तब है जब जी ते जी कुछ करगुज़रिये’

आज भारत के 70 वें गणतंत्र दिवस पर ऐसे वीर, लोक नायक को ढेरों शुभकामनाएं और नमन।

वन्दे मातरम , जय हिन्द !

डॉ सौरभ माथुर

एक छोटी सी कविता जो आज अजय कुमार जी ने गणतंत्र के पर्व पर सुनाई :

# आओ कुछ ऐसा कर जायें #
चन्दा सूरज बन कर जग में
सबको प्रेम-प्रकाश लुटायें
मानरहित हो, भाव-सिन्धु बन
परहित-दीपक सदा जलायें
आओ कुछ ऐसा कर जायें !
जो हैं अटके-भूले-भटके
उनको खोज सामने लायें
दीन-हीन-जन-मन को छूकर
जीवन में ख़ुशियाँ लौटायें।
आओ कुछ ऐसा कर जायें !
नहीं सभी सौभाग्य-धनी हैं
उनको बढ़ मज़बूत करें हम
कर मज़बूत निखारें जीवन
जन-सेवा-हित हाथ बढ़ायें।
आओ कुछ ऐसा कर जायें !
उपनिषदों, वेदों ने विचारा
वसुधा ही परिवार हमारा
अग जग जगमग करने को हम
दीप ज्ञान का सदा जलायें।
आओ कुछ ऐसा कर जायें !
ख़ाली आना, ख़ाली जाना
जीवन का यह चक्र पुराना
हेतु-रहित परहित-रत होकर
जीवन अर्थवान कर पायें।
आओ कुछ ऐसा कर जायें !!

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